Basant Panchami
Basant Panchami

Basant Panchami : बसंत पंचमी 26 जनवरी गुरुवार को इस बार मनाई जाएगी और इस दिन विधि-विधान से ज्ञान और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है और उनके प्रिय भोग लगाया जाता है। मां सरस्वती को पीला रंग सबसे प्रिय माना जाता है। इसलिए पीले वस्त्र पहनकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें पीले रंग के फूल, पीली मिठाई और पीले फल अर्पित किए जाते हैं। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन व विवाह के अबूझ मुहर्रत के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है।

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती से ज्ञान, विद्या, बुद्धि और वाणी के लिए विशेष वरदान मांगा जाता है। देवी सरस्वती का पूजन सफेद और पीले पुष्पों से किया जाता है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना करने से आपके जीवन में स्थायित्व आता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

(Shubh Muhurat of Basant Panchami 2023) बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त-

26 जनवरी, दिन गुरुवार को सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त- 07.12 A.M से 12.34 P.M तक।
पूजन की कुल अवधि – 05 घंटे 21 मिनट।
बसंत पंचमी मध्याह्न टाइम- 12.34 PM।

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सरस्वती कथा-

बसंत पंचमी कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने मनुष्य योनि की रचना की, परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे, तब उन्होंने विष्णु जी से आज्ञा लेकर अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छिड़क दिया, जिससे पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा।

पूजन विधि-

बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त में किसी शांत स्थान या मंदिर में पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
अपने सामने लकड़ी का एक सिंहासन रखें। सिंहासन पर सफेद वस्त्र बिछाएं तथा उस पर सरस्वती देवी का चित्र लगाएं।
उस सिंहासन पर एक तांबे की थाली रखें। यदि तांबे की थाली न हो, तो आप अन्य पात्र रखें।
इस थाली में कुमकुम या केसर से रंगे हुए चावलों की एक ढेरी लगाएं।
अब इन चावलों की ढेरी पर प्राण-प्रतिष्ठित एवं चेतनायुक्त शुभ मुहूर्त में सिद्ध किया हुआ ‘सरस्वती यंत्र‘ स्थापित करें।
इसके पश्चात ‘सरस्वती‘ को पंचामृत से स्नान करवाएं।
सबसे पहले दूध से स्नान करवाएं, फिर दही से, फिर घी से स्नान करवाएं, फिर शकर से तथा बाद में शहद से स्नान करवाएं।
केसर या कुमकुम से यंत्र तथा चित्र पर तिलक करें।
इसके बाद दूध से बने हुए नैवेद्य का भोग अर्पित करें।
साथ ही सरस्वती माता के नाम से ऽ‘ॐ श्री सरस्वतयै नमः स्वाहा‘,, इस मंत्र से 108 बार हवन करें।

हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन की भभूत मस्तक पर लगाएं।