Fake Birth Certificate
Fake Birth Certificate

भोपल। देवास में रहने वाले एक आरआई के बेटे का भोपाल के दलालों ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बना दिया। इसी के आधार पर किशोर का इंदौर की एक स्पोर्ट्स अकेडमी में एडमिशन हो गया। जहां जन्मप्रमाण पत्र की जांच में वह फर्जी पाया गया। जिसके बाद में आरआई ने मामले की शिकायत थाने में की।

जांच के बाद में कोहेफिजा पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। आरोपी की अभी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।एएसआई रमेश शर्मा के अनुसार जगदीश पाटिल पुत्र भैयालाल पाटिल (53) देवास के रहने वाले हैं। उनका बेटा पवित्र पाटिल है। जगदीश के बेटे का जन्म भोपाल के निजी अस्पताल में हुआ था। जगदीश का ससुराल अशोका गार्डन में है। उनके साले ने एक दलाल रविंद्र गुप्ता के माध्यम से पवित्र का जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था।

स्पोर्ट्स एकेडमी में एडमिशन हुआ-

अब पवित्र का इंदौर की एक स्पोर्ट्स एकेडमी में एडमिशन हुआ। जहां उसके जन्म प्रमाण पत्र की जांच अकेडमी वालोंं ने कराई। इसके लिए भोपाल नगर निगम से जन्मप्रमाण पत्र को वेरीफाई कराया गया। निगम की ओर से जन्म प्रमाण पत्र फर्जी होने की जानकारी दी गई। जिसके बाद में फरियादी की ओर से शिकायत की गई। घटना स्थल भोपाल कलेक्टोरेट था, जिसके आधार पर कोहेफिजा पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु की है। आरोपी की अभी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

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नियुक्ति दिलाने के नाम पर 18 लाख की धाेखाधड़ी

भोपल। काेहेफिजा थाना पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर एक शातिर ठग के खिलाफ धाेखाधड़ी का केस दर्ज किया है। दाे वर्ष पहले उसने महिला काे एविएशन विभाग में संचालक के पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा देकर 18 लाख रुपये हड़प लिए थे। पुलिस आराेपी की तलाश कर रही है।

काेहेिफजा थाने के एसआइ रामप्रकाशसिंह ने बताया कि सीहाेर निवासी रेखा रैकवार ने शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया नौकरी की तलाश के दौरान आठ फरवरी 2020 काे उसका फाेन पर सुकांताे दास चक्रवर्ती नाम के व्यक्ति से संपर्क हुआ था। चक्रवर्ती ने महिला के शैक्षणिक दस्तावेज देखने के बाद बाेला कि वह उसकी नौकरी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एविएशन विभाग में संचालक के पद पर लगवा सकता हूं। इसके लिए उसने रुपयाें की मांग की।

सुकांताें काे पहली किस्त में 5,50,000 रुपये दिए-

नौकरी के लालच में रेखा रैकवार ने काेहेफिजा की एक हाेटल में रुके सुकांताें काे पहली किस्त में 5,50,000 रुपये दिए। इसके बाद रेखा ने सीहाेर की एसबीआइ बैंक से 4, 50,000 रुपये सुकांताें के खाते में आन लाइन ट्रांसफर किए। इसके बाद आठ लाख रुपये और दिए। इस तरह उसने सुकांताें काे 18 लाख रुपये दे दिए। इसके बाद भी जब नौकरी नहीं लगी, ताे रेखा ने रुपये वापस मांगे। इस पर सुकांताें बहाने बनाने लगा। परेशान हाेकर रेखा ने थाने में शिकायत की। जांच के बाद सुकांताें के खिलाफ धाेखाधड़ी, अमानत में खयानत करने का केस दर्ज कर लिया गया है।