भोपाल। राजधानी भोपाल में चल रहा करणी सेना का आंदोलन आने वाले समय में मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार और भाजपा के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है। भाजपा सरकार ने करणी सेना के एक बड़े खेमे को नजर अंदाज कर नई मुसीबत मोल ले ली है। करणी सेना के लाखों समर्थक बीते दिनों से राजधानी में डेरा डाले हुए हैं और अपनी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं। 5 जनवरी को मुख्यमंत्री निवास में क्षत्रिय समागम आयोजित किया।

महाराणा प्रताप जयंती पर छुट्‌टी सहित करीब डेढ़ दर्जन घोषणाएं

इस कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने रानी पद्मावती का स्मारक बनाने का ऐलान करते हुए महाराणा प्रताप जयंती पर छुट्‌टी करने सहित करीब डेढ़ दर्जन घोषणाएं कीं। दरअसल, करणी सेना का काफी पहले से ही प्रदर्शन निश्चित था। इसके लिए काफी पहले से इसकी तैयारी चालू कर दी गई थी, लेकिन बात नहीं बनी।

सरकार युवाओं की मांगों को सुनना भी नहीं चाहती थी : कमलनाथ

इस कार्यक्रम को जीवन सिंह शेरपुर जो कि करणी सेना के प्रमुख हैं ने बीजेपी नेताओं का प्रोग्राम करार दिया और 8 जनवरी का कार्यक्रम और ज्यादा भीड़ के साथ करने का ऐलान कर दिया। वहीं पूर्व सीएम कमलनाथ ने इस मामले पर ट्वीट कर कहा कि भाजपा सरकार द्वारा कार्यक्रम की अनुमति को रद्द कराना, परिवहन व्यवस्था में बाधा डालना और फिर युवाओं के दबाब में पुनः अनुमति देना, पूरे आंदोलन को बाधित करने और लोकतांत्रिक प्रणाली में शिवराज सरकार के विश्वास न होने को दर्शाता है। लोकतांत्रिक आंदोलन, विरोध और प्रदर्शन को पुलिस, पैसा और प्रशासन से कुचलना भाजपा सरकार की नीति बनती जा रही है। लोकतांत्रिक तरीके से विचारों तथा मांगों को रखना और शांतिपूर्ण आंदोलन करना, देश के हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन भाजपा सरकार युवाओं की मांगों को सुनना भी नही चाहती थी और आंदोलन को रद्द कराने में लगी रही।

नेता प्रतिपक्ष ने भी बोला सरकार पर हमला

नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविन्द सिंह ने कहा कि भाजपा की सरकार करणी सेना के साथ अन्याय कर रही है। करणी सेना की जो जायज मांगें हैं उन्हें मानना चाहिए। करणी सेना ने जो मांग पत्र भेजा है उसमें पिछडे़ वर्ग, एससी, एसटी वर्ग के साथ न्याय की बात की है। अगर उसमें कुछ गलत हो तो उसमें सुधार करने में सरकार को कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए। लेकिन शिवराज सिंह की जो मानसिकता है वो सामान्य वर्ग के पक्ष में नहीं हैं।

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उबल गया है क्षत्रियों का खून

मामले को शांत करने की जगह भोपाल पुलिस ने मानो आग में घी डालने का काम कर दिया। इतिहास गवाह रहा है कि क्षत्रियों को प्रेम से समझा कर मना सकते हैं ना की बल दिखाने से। भोपाल पुलिस ने करणी सेना के इस आंदोलन को कुचलने के लिए बल दिखाने का प्रयास किया, इससे क्षत्रियों का रोष और गुस्सा ज्यादा भड़क गया। पुलिसिया कार्यवाही से चिड़कर उन्होंने असंभव सी मांगों की सूची मंत्री भदौरिया को पकड़ा दी, जिस पर उन्होंने असहमति भी जता दी।