Survey Annual Status of Education
Survey Annual Status of Education

भोपाल। मध्यप्रदेश में 2006 में 11-14 वर्ष की 7.3 प्रतिशत लड़कियां अनामांकित थीं। इस आंकड़े में अगले दशक में कोई ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है, 2018 में भी आंकड़ा 7.7 प्रतिशत रहा है। हालांकि अब 2022 में मध्यप्रदेश में 11-14 वर्ष की 3.8 प्रतिशत लड़कियां अनामांकित हैं। यानि लड़कियों के नामांकन में 3.9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और ज्यादा बेटियां स्कूल जा रही हैं।

यह आंकड़ा शिक्षा की वार्षिक स्थिति पर होने वाले सर्वेक्षण एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन (असर-2022) की बुधवार को जारी हुई रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 15-16 वर्ष की बड़ी लड़कियों में अनामांकित लड़कियों के अनुपात में भी कमी आई है। 2014 में राज्य स्तर पर 15-16 आयु वर्ग की 23.7 प्रतिशत लड़कियां अनामांकित थीं।

दो साल बाद 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 29.8 प्रतिशत हो गया था, और 2018 में 26.8 प्रतिशत। उसके पश्चात 15-16 साल की अनामांकित लड़कियों के अनुपात में गिरावट आकार यह अब 17 प्रतिशत हो गया है। यह आंकड़ा शिक्षा की वार्षिक स्थिति पर होने वाले सर्वेक्षण एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन (असर-2022) की बुधवार को जारी हुई रिपोर्ट में सामने आया है।

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मप्र में निजी ट्यूशन लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में हुआ 4 प्रतिशत का इजाफा :

निजी ट्यूशन लेने वाले पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ है। 2018 और 2022 के बीच यह अनुपात सरकारी और निजी दोनों विद्यालयों के बच्चों के लिए और बढ़ा है। मध्यप्रदेश में 2022 में ट्यूशन क्लास लेने वाले कक्षा 1-8 के छात्रों का प्रतिशत 15 प्रतिशत है।

जबकि 2018 में यह 11 प्रतिशत था। जबकि पूरे देश में साल 2022 में ट्यूशन क्लास लेने वाले कक्षा 1-8 के छात्रों का प्रतिशत 30.5 प्रतिशत है, जबकि यह आंकड़ा साल 2018 में 26.4 प्रतिशत था। प्राप्त आंकड़े के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में इस अनुपात में 2018 के बाद 8 प्रतिशत पॉइंट या उससे अधिक की वृद्धि हुई है। वहीं मध्यप्रदेश में 4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

मुख्य बिंदु :

-असर-2022 देश के 616 जिलों के कुल 19,060 गांवो तक पहुंचा

– इसमें 3,74,544 घरों और 3 से 16 वर्ष के 6,99,597 बच्चों का सर्वेक्षण किया गया
– मप्र (ग्रामीण) में 50 जिलों के 1499 गांवों को शामिल किया गया

– मप्र के इन गावों के 29,829 घरों और 3 से 16 वर्ष के 59,939 बच्चों का सर्वेक्षण किया गया