संन्यास लेना चाहता था यह दिग्गज भारतीय क्रिकेटर, लेकिन पिता की समझाइश ने बचा लिया करियर

दक्षिण अफ्रीका में अभ्यास सत्र के दौरान रविचंद्र अश्विन को समझाते कोच राहुल द्रविड़।

मुंबई। खिलाड़ियों के जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। हमेशा एक जैसा प्रदर्शन कोई नहीे कर सकता। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी प्रदर्शन को लेकर बुरे दौर से गुजरे हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मैदान में जबरदस्त वापसी की। ऐसे ही दिग्गज भारतीय खिलाड़ी हैं रविचंद्रन अश्विन। दो-तीन साल पहले अश्विन खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। शरीर उनका साथ नहीं दे रहा था। उनके मन में बार-बार संन्यास लेने का ख्याल आता था। वह इस संबंध में अपनी पत्नी प्रीति से ही बात करते थे। इसकी भनक उनके पिता रविचंद्रन को लग गई। पिता ने अश्विन को अपने पास बुलाया और समझाया कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। मन को मजबूत रखो। तुम फिर से क्रिकेट के छोटे स्वरूप में वापसी करोगे। उल्लेखनीय है कि अश्विन के पिता रविचंद्रन खुद क्रिकेटर रहे हैं। क्लब क्रिकेट खले चुके हैं और तेज गेंदबाज थे। अश्विन के पिता रविचंद्रन दक्षिण रेलवे मे से सेवानिवृत्त हैं।
क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफो ने अश्विन के हवाले से दावा किया है कि खराब फॉर्म की वजह से वह संन्यास लेने की सोच रहे थे। अश्विन ने कहा कि एक समय ऐसा था जब वे छह गेंद फेंकने पर थकान महशूस करते थे। लेकिन पिताजी के समझाने के बाद उन्होंने संन्यास का फैसला त्याग दिया। उल्लेखनीय है कि अश्विन टेस्ट क्रिकेट में अनिल कुंबल और कपिल देव के बाद भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज हैं। अश्विन 81 टेस्ट मैचों में 427 विकेट ले चुके हैं। अश्विन कपिल देव के रिकॉर्ड 131 टेस्ट मैच में 434 विकेट के रिकॉर्ड को तोड़ने से 8 विकेट दूर हैं। उम्मीद की जा रही है कि दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर वह यह उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। भारत की ओर से सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट अनिल कुंबले ने 132 टेस्ट मैचों में 619 विकेट लिए हैं। उल्लखेनीय है कि अभी हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई दो मैचों की टेस्ट सीरीज में रविचंद्रन अश्विन मैन ऑफ द सीरीज चुने गए थे। उन्हें टी-20 विश्वकप के लिए भी टीम में चुना गया था, जिसमें उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया।