70 वर्षों तक निरक्षर बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने वाले पद्मश्री नंद किशोर प्रुस्टी का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक  

नई दिल्ली। पद्मश्री नंद किशोर प्रुस्टी का निधन मंगलवार 7 दिसंबर को एक निजी अस्पताल में हो गया। दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर 104 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। लोगों के बीच वह नंदा सर के नाम से प्रसिद्ध थे। पिछले महीने ही उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई दूसरे नेताओं ने शोक जताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट करते हुए लिखा कि नंद किशोर प्रुस्टी जी के निधन से आहत हूं। ओडिशा में शिक्षा और ज्ञान की खुशियों को फैलाने के उनके प्रयासों के कारण बहुत सम्मानित नंदा सर को पीढ़ियों तक याद किया जाएगा। उन्होंने कुछ हफ्ते पहले पद्म पुरस्कार समारोह में देश का ध्यान और स्नेह आकर्षित किया था।

अमित शाह ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि नन्द किशोर प्रुस्टी जी के निधन से गहरा दुख हुआ। उन्हें हाल ही में ओडिशा में बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने में उनके अग्रणी योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। राष्ट्र इस महान आत्मा को उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए हमेशा याद रखेगा।

किसी से बिना एक रुपया लिए 70 वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया
ओडिशा के रहने वाले नंद किशोर प्रुस्टी को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए पिछले महीने ही राष्ट्रपति के हाथों पद्म पुरस्कार मिला था। उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई थी और वह केवल सातवीं तक ही पढ़ पाए थे। लेकिन उन्होंने अनपढ़ बच्चों को साक्षर बनाने अपना जीवन लगा दिया।

पद्मश्री नंद किशोर प्रुस्टी ने 70 वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया लेकिन कभी किसी बच्चे से फीस नहीं ली। लोकप्रियता का आलम यह था कि उड़िया अक्षर और गणित सीखने के लिए लोग अपने बच्चों को उनके पास भेजते थे।