World alzheimer’s day : विश्व अल्जाइमर दिवस, जानें इसके लक्षण और कारण

सारांश न्यूज डेस्क । वर्ष 2012 से प्रति वर्ष पूरी दुनिया में 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस के रूप में मनाया जाता है। अल्जाइमर की पहचान सबसे पहले एक जर्मन मनोचिकित्सक (German psychiatrist) एलोइस अल्जाइमर ने 1901 में इलाज के दौरान अपनी 50 वर्षीय महिला रोगी में इस बीमारी की पहचान की थी। इसलिए, इस बीमारी का नाम उनके नाम रखा गया।

इस बीमारी में मस्तिष्क में दो प्रोटीन, एमिलॉयड बीटा और टाउ का निर्माण होता है, जो न्यूरॉन्स को प्रभावित करते हुए उसे नष्ट करते हैं। इसके अलावा हेड इंजरी, वायरल इंफेक्शन और ब्रेन स्ट्रोक Brain Strock में भी अल्जाइमर की स्थिति पैदा हो सकती है। सबसे गंभीर विषय यह है कि लगभग प्रति वर्ष भारत में इसके 10 लाख से ज्यादा मामले आ रहे हैं फिर भी इसके प्रति समाज में जागरूकता बेहद ही कम है।

कई बार अल्जाइमर और डिमेंशिया में लोग अंतर नहीं कर पातें हैं। अल्जाइमर किसी भी उम्र में कई कारणों से पाया गया है मगर डिमेंशिया 60 से ऊपर के उम्र में सामान्यतः पाया गया है। इनदोनों में स्मृति लोप की समस्याओं के साथ अन्य कई संज्ञानात्मक क्षति भी देखने को मिलती है।

अल्जाइमर के लक्षण –

  • इसमें सोचने- समझने में कठिनाई महसूस होना
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • नई और वर्तमान चीजों को याद रखने में कठिनाई
  • दिमाग का पहले की तुलना में कम काम करना, भटकाव, बातें बनाना,भ्रम की स्थिति, सामान्य चीजे भूल जाना, सुधबुध खोना, तर्क या गणित के सामान्य क्रिया करने में समस्या महसूस करना होता है।
  • इसका प्रभाव जब व्यवहार पर पड़ता है तो व्यक्ति कई बार आक्रामक भी हो जाता है, खुद की देखभाल नहीं रख पाता, एक ही बात बार -बार बड़बड़ाता है, व्यक्तित्व में बदलाव, व्याकुलता, अपने में खो जाना, बेचैनी आदि महसूस करता है।
  • इसके प्रभाव मनोवैज्ञानिक रूप से भी पड़ता है जैसे मतिभ्रम, अवसाद, अपनी योग्यता में कमी महसूस करता है, इससे उसके मूड में भी बदलाव देखा जाता है जैसे,उदासीनता, गुस्सा, या मिज़ाज में बदलाव, अकेलापन,असंतुष्ट रहने लगता है।
  • धीरे-धीरे उसकी सामाजिक दूरी लोगों से काफी बढ़ जाती है। वह कई बार अपनों पर विश्वास भी नहीं करता है।
  • अल्जाइमर विकसित होने से पहले कुछ संकेत के रूप में इसके कुछ शुरुआती लक्षण से रोगी को महसूस होता है जैसे कि उसे कुछ दैनिक कार्यों को याद रखने या करने में कठिनाई महसूस हो सकती है।

अल्जाइमर कई कारण से हो सकता है –

  •  वैसे तो अल्जाइमर का उम्र से ज्यादा सम्बन्ध नहीं पाया गया है यह किसी उम्र में हो सकता है लेकिन बढ़ती उम्र के साथ इसके होने की जोखिम बढ़ जाती है।
  •  जो लोग डाउन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं उन्हें अल्जाइमर होने का खतरा काफी रहता है।
  •  विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार में किसी को अल्जाइमर है तो खतरा बढ़ जाती है मगर उनका यह भी कहना है कि इस बात की अभी तक किसी शोध से पुष्टि नहीं हो पाई गई है कि अल्जाइमर का कितना अनुवांशिक प्रभाव है।
  •  सिर में चोट लगने के बाद ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजुरी के बाद भी अल्जाइमर के खतरे देखने को मिलते हैं।
  •  अन्य कारण में वायु प्रदूषण, सोने का गलत तरीका, नशे की लत, अल्कोहल का अत्यधिक सेवन, बिगड़ते जीवनशैली जैसे मोटापा, व्यायाम की कमी, अनियंत्रित टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल के भी कारण अल्जाइमर होने की संभावना बढ़ जाती है।

यह बीमारी लगातार बढ़ती ही जाती है इसलिए इसे प्रोगेसिव डिसीज़ भी कहते हैं। यह एक बार होने के बाद इलाज से पूर्णतः ठीक नहीं हो सकती, लेकिन सही समय पर इलाज से इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीमारी से रोगी और रोगी के परिवार को काफी मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ता है। इस कारण इसके लिए डॉक्टर के सलाह से दवा लेने के साथ मनोवैज्ञानिक चिकित्सा से रोगी और उनके परिवार के तनाव को कम करने एवं जीवनशैली सुधार कर उनके पुनर्वास में मदद किया जा सकता है।

स्मिता कुमारी
पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, भोपाल

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