ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस भाजपा आमने-सामने, विधानसभा में हुई तीखी बहस

भोपाल। ओबीसी आरक्षण पर पिछले दिनों आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। इस स्थिति के लिए दोनो एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और ओबीसी के हितैषी बनने का प्रयास कर रहे हैं। कोर्ट के फैसले के खिलाफ जहां सत्ताधारी भाजपा फिर कोर्ट जाने का कह रही है तो वहीं कांग्रेस इस मामले पर मंगलवार को विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लेकर आई।

सरकार की असमंजस के कारण बने ये हालात: कमलेश्वर पटेल

कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव पर सबसे पहले बोलते हुए पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक कमलेश्वर पटेल ने कहा कि ओबीसी आरक्षण पर जो मौजूदा स्थिति बनी है उसके लिए सरकार जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 5 दिन बाद भी सरकार में पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस बनी है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जल्दबाजी में परिसीमन और आरक्षण को लेकर अध्यादेश लेकर आई थी। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि कोर्ट के अलावा लोक सेवा आयोग राज्य सेवा आयोग में भी रिजर्वेशन किया जाना चाहिए इसके लिए मध्यप्रदेश विधानसभा एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे।

कांग्रेस ने किया था आधारहीन परिसीमन: भूपेंद्र सिंह ठाकुर
वही नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मनमाने तरीके से परिसीमन किया था। उन्होंने अपने आरोप की पुष्टि में कहा कि कांग्रेस इस मामले को लेकर 5 बार न्यायालय में गई। इसके जवाब में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक तरुण भनोट ने कहा सरकार को बताना चाहिए कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील खड़े क्यों नहीं हुए।