online gambling : अमीर बनाने का सपना दिखाकर सड़क पर ला रहे ऑनलाइन गेम

हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को 3 महीने में कानून बनाने को कहा

सारांश न्यूज़ डेस्क, भोपाल
मोबाइल फोन पर लोग तो अक्सर गेम खेलते रहते हैं, लेकिन अब ये ‘जुआ घर’ भी बनता जा रहा है। प्रदेश में युवा इस वर्चुअल जुएं online gambling के जाल में फंस कर न सिर्फ घाटे में जा रहे हैं, बल्कि बीमारियों से भी घिर रहे हैं। भोपाल में मनोवैज्ञानिकों के पास हर महीने 4-5 ऐसे केस आ रहे हैं।

एक इंजीनियर तो पिछले 6-7 साल में करीब 40 लाख रुपए गंवा चुका है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक ये एक तरह का डिसऑर्डर या नशा है। ऑनलाइन गेम online game की बात करें तो इनके जाल में फंसकर MP में दो बच्चे सुसाइड कर चुके हैं। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस संबंध में मध्यप्रदेश सरकार को 3 महीने में कानून बनाने को कहा है।

3 मामलों से समझिए कितनी खतरनाक है ऑनलाइन गैम्बलिंग
केस-1 : भोपाल का 37 साल का युवक अमेरिका में इंजीनियर था। किसी कारण कुछ समय पहले वह भोपाल आ गया। कोविड में लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन गैम्बलिंग की लत लग गई। वह मोबाइल पर तीन पत्ती खेलने लगा। शुरुआत में तो फायदा हुआ। इससे उसका लालच बढ़ता गया। फिर धीरे-धीरे जाल में फंसता चला गया। वह परेशानियों में घिरने लगा। नींद में बदलाव आने लगा। स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया। घरवालों ने डेली रुटीन में बदलाव महसूस किया। करीब डेढ़ महीने से उसकी काउंसिलिंग हो रही है। उसने 6-7 साल में करीब 40 लाख रुपए गंवा दिए हैं। इसके अलावा एक 23 साल का युवा भी गेम की लत में पड़ गया। उसकी भी काउंसिलिंग की जा रही है।

केस-2 : सिंगरौली का सनत अपने नाना का लाडला था। नाना ने बुढ़ापे के लिए पाई-पाई जोड़कर बैंक में कुछ लाख रुपए जमा किए थे। एक दिन उन्हें पता चला कि बैंक से साढ़े आठ लाख रुपए किसी ने उनके नाम पर निकाल लिए हैं। जांच की तो पता चला कि ऑनलाइन जुएं (गैम्बलिंग) की लत के चलते सनत ने ही फर्जी तरीके से खाते से पैसे निकाले थे। सारे पैसे वो ऑनलाइन गेम में हार गया। अब सनत जेल में है।

केस- 3 : इंदौर का 31 साल का सौरभ (परिवर्तित नाम) भी ऑनलाइन गैम्बलिंग के चक्कर में पैसा ही नहीं, प्रतिष्ठा भी गंवा चुका है। लॉकडाउन के दौरान एक दोस्त ने उसे इन गेम्स के बारे में बताया था। शुरुआत में 50 रुपए बोनस मिला तो खेलने लग गया। 100 या 500 रुपए की बाजी लगाई। थोड़ा बहुत जीता तो लालच आ गया। फिर बाजी बढ़ती गई और पैसे हारता चला गया। हारे हुए पैसे जीतने की सनक में रुपए चोरी करने लगा। दो साल तक हारने के बाद समझ आया कि यह खेल जीतने का नहीं हारने का है। भले ही, सौरभ अब गेम खेलना छोड़ चुका है, लेकिन गेम के कारण पैदा हुए कर्जदार आज भी पीछा कर रहे हैं।

बच्चों से जुड़े ये 2 मामले भी जान लीजिए…
छतरपुर : 2 अगस्त 2021 को 40 हजार हारा तो सिविल लाइन थाना क्षेत्र में कृष्णा पांडे (13) फंदे पर झूल गया। वह 6वीं का छात्र था। उसे फ्री फायर गेम खेलने की लत थी। कृष्णा मां के बैंक अकाउंट से 40 हजार रुपए हार गया था। मां को मोबाइल पर पैसे कटने का मैसेज मिला, तब पता चला। पुलिस ने गेम संचालक के खिलाफ धारा 305 के तहत केस दर्ज किया।

भोपाल: 13 जनवरी 2022 को भोपाल के शंकराचार्य नगर बजरिया के सूर्यांश (11) ने फांसी लगा ली। वह सेंट जेवियर स्कूल में 5वीं का स्टूडेंट था। सूर्यांश ऑनलाइन गेम का शौकीन था। गेम फाइटर की ड्रेस भी ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगाई थी।

यूजर के पास से पैसा जाता है, लेकिन आता क्यों नहीं ?
गेम खेलने वाला जब पैसा लगाता है तो उसके पास कई पॉइंट्स होते हैं। कई बार उसके पास इतने अधिक पॉइंट्स होते हैं कि वो खुद को लखपति समझने लगता है। वो रुपए को निकालना चाहता है, लेकिन ज्यादातर गैम्बलिंग एप नियमों और लालच भरे ऑफर देकर उसे ऐसा नहीं करने देते। हजार-पांच सौ रुपए तो निकाल लेता है, लेकिन जब राशि ज्यादा होती है तो नहीं निकाल पाता। ज्यादातर एप ऐसे होते हैं जिसमें से पूरा खेल जीतने पर ही पैसा निकाल सकते हैं। बहुत कम एप ऐसे हैं, जो आपको कभी भी रुपया अपने खाते में ट्रांसफर करने की सुविधा देते हैं। आजकल कई एप जीता हुआ पैसा तुरंत ट्रांसफर करने का लालच देकर लोगों को फंसा रहे हैं।

इसलिए इसकी लत नहीं छूटती
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि इन गेम्स की लत इसलिए नहीं छूटती, क्योंकि इनका एक्सेस यूजर के हाथों में होता है। वह खाते-पीते हुए यहां तक कि बाथरूम में बैठकर भी खेल को जारी रखता है। कई उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं कि लोग काम के दौरान भी ऐसे गेम खेलते हैं और अपनी नौकरी गंवा देते हैं।

डीसीपी क्राइम ब्रांच अमित कुमार का कहना है कि इस तरह की इस साल 20 शिकायतें मिली हैं। डिपॉजिट करवा कर चलते हैं। इसमें क्वॉइन उनको दिखाते हैं, लेकिन पैसा नहीं देते। ऐसे मामलों में आरोपी तक पहुंचना मुश्किल होता है।