दगा की सज़ा : भाजपा ने चिन्हित किए “दोगले” अल्पसंख्यक भाजपाई, कार्यवाही जल्द

सरकार की मंशा को मिटाने जुटे हैं भीतरघात में, अदालत तक की कार्यवाहियों में पर्दे के पीछे से निभा रहे भूमिका

सारांश न्यूज़ डेस्क, भोपाल
पार्टी में रहकर पार्टी और सरकार की मंशाओं को लगातार चोट पहुंचा रहे कई मुस्लिम भाजपाई Muslim BJP अब संगठन के निशाने पर हैं। मुस्लिम संस्थाओं में नियुक्तियां की कवायदों के बीच की गई इनकी दोगलाई के लिए संगठन सख्त रुख अपनाने के मूड में दिखाई दे रहा है। पार्टी के ऐसे “हरिराम” और विघ्न संतोषियों की खोज के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक गोपनीय जांच अभियान चलाया था। जिसकी रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले नामों का खुलासा हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि भाजपा संगठन ने ये गुपचुप खोज अभियान तब शुरू किया था, जब पार्टी और सरकार की मप्र वक्फ बोर्ड गठन की मंशा के बीच कुछ मुस्लिम भाजपाइयों द्वारा व्यवधान डालने की खबरें संगठन के कानों तक पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि बोर्ड गठन के खिलाफ कई मुस्लिम भाजपाई ने परदे के पीछे रहकर अदालतबाजी का खेल शुरू कर दिया है। जिसके अपनी सरकार के चलते भाजपा अपनी मर्जी का बोर्ड नहीं बना पा रही है। इधर, इस पूरी विघटन कार्यवाही के चलते प्रशासन को कई बार अदालत के सामने नजरें नीची करने की नौबत भी आई है।

चिन्हित हुए कई
सूत्रों का कहना है कि पार्टी के हरिराम को खोजने तैनात की गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले नामों का खुलासा किया है। इन नामों में भाजपा संगठन में शामिल कुछ अल्पसंखयक शामिल हैं तो कई ऐसे चेहरे भी मौजूद हैं, जिन्हें पार्टी पिछले कार्यकाल के दौरान मुस्लिम संस्थाओं में उच्च पदों से नवाज़ चुकी है। पदों से विमुख हो चुके बुजुर्ग भाजपाइयों के अलावा पदों की दावेदारी करने वाले कुछ नवागत चेहरे भी इनमें शामिल हैं। सूत्रों का कहना है भाजपा संगठन के पास पहुंची इस सूची को फिलहाल गोपनीय रखा गया है। कहा जा रहा है कि पार्टी में रहकर इसको नुकसान पहुंचाने वाले इन नामों के लिए सजा की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस बात पर भी मंथन जारी है कि इस सजा वाली कार्यवाही से पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में कितना नुकसान हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि संगठन दगा करने वाले लोगों को कड़ी सजा देकर भविष्य में पार्टी का अनुशासन मजबूत रखने की नीयत भी रखती है।

प्रशासन की नजर उन पर, जिनका नहीं छूट रहा वक्फ का मोह
सूत्रों का कहना है कि मप्र वक्फ बोर्ड चुनाव में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को गुमराह करने वालों में बड़ी भूमिका उन तीन अधिकारियों की रही है, जो अलग अलग अवधियों में मप्र वक्फ बोर्ड के सीईओ रह चुके हैं। इनमें एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्रों का कहना है विभाग को वक्फ अधिनियम की गलत व्याख्या कर भ्रमित कर लगातार अदालती मामलों में उलझाने में रिटर्निंग अधिकारी बनाए गए दाऊद अहमद खान की अहम भूमिका रही है। जबकि खुद को वक्फ नियमों के ज्ञाता करार देने वाले एक और पूर्व सीईओ डॉ एसएमएच भी विभाग के आला अधिकारियों को लगातार गुमराही की तरफ ले गए हैं। जिससे विभाग को पूरी गठन प्रक्रिया में मुंह की खाना पड़ी है।

सूत्रों का कहना है कि विभाग के एक आला अधिकारी के करीबी माने जाने वाले डॉ जैदी ने भी नियुक्तियों को लेकर कई नियम विरुद्ध कही जाने वाली कार्यवाहियों की तरफ बढ़ा दिया है। जिससे चुनाव प्रक्रिया उलझती जा रही है। कहा जा रहा है कि ये तीनों पूर्व सीईओ, अध्यक्ष के दावेदार अलग अलग लोगों के लिए वालेंटियरी काम कर रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने अध्यक्ष बनने वाले सदस्य से अलग अलग वादे ले रखे हैं।