पेड़ काटने से बचाना भी पेड़ लगाने के बराबर है: मुख्यमंत्री

भोपालमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज स्मार्ट पार्क में करंज और गुलमोहर के पौधे लगाए। मुख्यमंत्री के साथ गो-काष्ठ मॉडल के प्रचार-प्रसार में संलग्न पर्यावरण वैज्ञानिक योगेंद्र सक्सेना सहित कुमारी प्राची और कुमारी मान्या ने भी पौधे लगाए। मुख्यमंत्री ने गौ-काष्ठ के निर्माण और उपयोग की जानकारी प्राप्त कर इन प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पेड़ को कटने से बचाना, पेड़ लगाने के बराबर है।

कलेक्टर भोपाल अविनाश लवानिया ने मुख्यमंत्री को बताया कि स्व-सहायता समूह की महिलाएं गौ-काष्ठ निर्माण में योगदान दे रही हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए गौ-काष्ठ का उपयोग कारगर सिद्ध हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगल काटने से बचाना पर्यावरण बचाने और जिंदगी बचाने का कार्य है।

पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी है गौ-काष्ठ

मुख्यमंत्री को पर्यावरण वैज्ञानिक सक्सेना ने बताया कि अब होलिका दहन और अंतिम संस्कार जैसे कार्यों में गौ-काष्ठ का उपयोग होने लगा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को गौ-काष्ठ के नमूने भी दिखाए। उन्होंने बताया कि प्रदूषण निवारण मंडल प्लास्टर ऑफ पेरिस से भगवान गणेश की प्रतिमा के वैज्ञानिक पद्धति से विसर्जन के प्रयासों में सक्रिय है।

ऐसा सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री सेनेटरी नेपकिन भी तैयार किया गया है, जो खुले स्थान पर फेंकने, दफन करने या जला देने पर पर्यावरण के लिए नुकसानदायक नहीं होगा। सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री सेनेटरी नेपकिन बायो मेडिकल वेस्ट की तरह इंसीनरेटर में नष्ट करना संभव हो गया है। दीपदान के उद्देश्य से नदियों में गोबर, दाल और दलिया के चूरे से निर्मित दीपक का उपयोग हो रहा है, जो मछलियों के खाने योग्य और नदियों के पर्यावरण को बचाने में प्रभावी है।

गुलमोहर विश्व के सुंदरतम वृक्षों में से एक

गुलमोहर को विश्व के सुंदरतम वृक्षों में से एक माना गया है। गुलमोहर की सुव्यवस्थित हरे रंग की फर्म जैसी झिलमिलाती पत्तियों के बीच बड़े-बड़े गुच्छों में खिले फूल इस वृक्ष को अलग ही आकर्षण प्रदान करते हैं। गर्मी के दिनों में गुलमोहर के पेड़, पत्तियों की जगह फूलों से लदे हुए रहते हैं। यह औषधीय गुणों से भी समृद्ध है।