हिमाचल का मुखिया कौन : पहाड़-घाटी तो जीत लिए पर मुखिया पर जंग अभी है बाकी

विक्रमादित्य सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू में टक्कर

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शिमला । हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं हर बार की तरह इस बार भी रिवाज ही कायम रहने वाला है। भाजपा इतिहास बदलने का सपना जरूर संजोए थी, परंतु जनता के आदेश के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला है। हिमाचल में सरकार बनाने के लिए 35 सीटों की जरूरत है और कांग्रेस ने इस जादुई आंकड़े को पार कर लिया है। ऐसे में हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है।

सीएम के नाम पर सस्पेंस

कांग्रेस ने हिमाचल के पहाड़ और घाटी पर तो विजय हासिल कर ली है परंतु अब सीएम के नाम के रूप में कांग्रेस को अभी जंग लड़ना बाकी है। प्रदेश में सरकार तो कांग्रेस बनाएगी लेकिन उनका सीएम कौन होगा इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। चुनाव से पहले कांग्रेस के कई नेताओं ने सीएम पद की दावेदारी ठोकी थी। लेकिन सीएम के दावेदारी पेश करने वाले कई उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं। जिससे पार्टी में अब सीएम पद के दावेदार थोड़े कम हो गए हैं। लेकिन सवाल अभी भी यही है कि कांग्रेस का सीएम कौन होगा?

कम से कम चार नामों के बीच होना है टक्कर

अब सवाल उठ रहा है कि विक्रमादित्य सिंह, प्रतिभा सिंह, सुखविंदर सिंह सुक्खू या फिर मुकेश अग्निहोत्री में से पार्टी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह का नाम भी इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। उनकी मां प्रतिभा सिंह कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष है। ऐसे में उनकी दावेदारी को नकारा नहीं जा सकता। हालांकि विक्रमादित्य पहले ही कह चुके हैं कि होली लॉज की डीएनए में मांगना नहीं है। मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर वो कह चुके हैं कि हमारे परिवार ने हमेशा लोगों को दिया ही है। कभी किसी से कुछ मांगा नहीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को लेकर जो फैसला आलाकमान करेगी, वह सभी को मान्य होगा।

प्रतिभा सिंह भी दौड़ में शामिल

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह भी सीएम की रेस में शामिल हैं। वह प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष हैं और जिस तरह से चुनावों के पहले उनकी नाराजगी की खबरें आई थी, उससे साफ है कि उनकी महत्वाकांक्षा कुछ और है। हालांकि वह चुनाव प्रचार के दौरान यह कह चुकी हैं कि वह रेस में शामिल नहीं है। लेकिन राजनीतिक बयान के मायने अलग है। हालांकि वो अपने बेटे की पैरवी हाईकमान के सामने कर सकती हैं।

राहुल गांधी के करीबी है सुखविंदर सिंह सुक्खू

इस लिस्ट में दूसरा नाम सुखविंदर सिंह सुक्खू का आता है। सुखविंदर कांग्रेस की चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष हैं। राहुल गांधी के बेहद करीबी सुखविंदर सिंह को राज्य में वीरभद्र सिंह के विरोध के बावजूद प्रदेश की कमान मिली थी। ऐसे में सुखविंदर सिंह की दावेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री भी नहीं है पीछे

विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री भी इस रेस में शामिल हो सकते हैं। अग्निहोत्री को वीरभद्र सिंह का बेहद करीबी माना जाता था। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी मुकेश अग्निहोत्री के नाम का समर्थन कर सकती हैं। हालांकि कांग्रेस आलाकमान जिस तरह से चुनाव के पहले आंतरिक कलह से परेशान था, उसे देखते हुए पार्टी सरप्राइज भी दे सकती है। ऐसे में अगले एक-दो दिन कांग्रेस के कई नेताओं की धड़कने बढ़ने वाली हैं।