सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों की हैं पेडेंसी, जमकर भड़के Bhopal कलेक्टर 

भोपाल. राजधानी में आम जनता अपनी समस्याओं को निपटाने या हल कराने के लिए सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन लापरवाह अफसर इस मामले में कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। हालात ये हैं कि सीएम हेल्पलाइन शिकायतों को निपटाने में भोपाल जिला लगातार पिछड़ रहा है।

नाराजगी जाहिर करते हुए बैठक में जमकर भड़के

इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कलेक्टर अविनाश लवानिया ने टीएल बैठक में जमकर भड़के। उन्होंने जिम्मेदार अफसरों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि यही रवैया रहा, तो लापरवाह अफसर अपनी वेतनवृद्धि रुकवाने के लिए तैयार रहें। गौरतलब है कि भोपाल जिला सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का निराकरण में 47वें नंबर पर है।

सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से कुल 15750 शिकायतें लोगों ने दर्ज कराई

भोपाल में पिछले महीने अक्टूबर में सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से कुल 15750 शिकायतें लोगों ने दर्ज कराई थी। यह शिकायतें सरकार के अलग-अलग विभागों से संबंधित हैं। विभाग के अधिकारी इन शिकायतों में से सिर्फ 41 प्रतिशत ही शिकायतों का संतुष्टि के साथ निराकरण किया। ऐसे में 15750 में से 6570 शिकायतों का ही निराकरण हो सका है। जबकि 9180 लोगों को अब भी अपनी शिकायतों के निराकरण का इंतजार है।

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अब वन्यप्राणी के हमले में मरने वाले के परिजनों को मिलेगी पेंशन!

भोपाल. प्रदेश के जंगलों और आसपास के ग्रामीण अंचलों में वन्य प्राणी हमले में मृत या स्थाई रुप से अपंग होंने वाले व्यक्ति के परिजनों को राज्य सरकार पांच साल तक पांच हजार रुपए मासिक पेंशन देने की तैयारी में है। वन विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेजा है।

स्टेट वाईल्ड लाईफ बोर्ड ने निर्णय लिया है कि वन्य प्राणियों द्वारा जनजानि, पशुहानि की वर्तमान दरों में संशोधन किया जाए। इसके तहत वन विभाग की वन्य प्राणी शाखा ने विभिन्न प्रस्ताव तैयार किए है। मुख्यमंत्री भी घोषणा कर चुके है कि वन्य प्राणी के हमले में करने वाले व्यक्ति के परिजन को चार लाख रुपए की जगह आठ लाख रुपए की राशि दी जाए।

वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि प्रदेश में कहीं भी वन्य प्राणियों के हमले में जान गंवाने वाले या स्थाई रुप से अपंग होंने वाले व्यक्ति के परिजनों को पांच हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाए। इस प्रस्ताव को कैबिनेट में लाया जाएगा वहां से मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा।

यह प्रस्ताव उन लोगों के लिए ज्यादा लाभकारी साबित होगा जो जंगलों की सुरक्षा में दिन-रात जुटे रहते है और जो जंगलों के आसपास के ग्रामीण अंचलों में निवास कर रहे है और वन्य प्राणियों के हमले के शिकार हो जाते है।