India tour of New Zealand : करो या मरो के मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों को होना होगा बेखौफ प्रदर्शन

पहले वन डे में पावर प्ले में भारतीय बल्लेबाजों ने की थी धीमी बल्लेबाजी

India tour of New Zealand
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हेमिल्टन । भारतीय टीम न्यजीलैंड दौरे पर तीन एक दिवसीय मैचों की सीरिज में फिलहाल 1-0 से पीछा है। रविवार को होने वाले दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में भारतीय टीम को हार मिलती है तो टीम इंडिया के हाथ से सीरिज भी निकल जाएगी। पहले एक दिवसीय मुकाबले में 306 रनों का स्कोर खड़ा करने के बाद भी टीम को हार का सामना करना पड़ा था।

करो या मरो का होगा मुकाबला

जब ‘करो या मरो’ के दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड से भिड़ेगी तो उम्मीद करेगी कि कप्तान शिखर धवन और युवा शुभमन गिल ‘पावरप्ले’ ओवरों में बेहतर रवैया अपनाएं। सीडन पार्क तीनों ओर से खुला मैदान है लेकिन न्यूजीलैंउ में बल्लेबाजों के लिए सबसे मददगार मैदानों में से एक के रूप में मशहूर है जिसमें बल्लेबाजों को अपने शॉट के लिये उचित रन मिलेंगे। पहले वनडे में धवन (77 गेंद में 72 रन) और गिल (65 गेंद में 50 रन) ने पहले विकेट के लिये 123 रन की भागीदारी निभाई थी लेकिन ईडन पार्क जैसे छोटे मैदान पर सात विकेट पर 306 रन का स्कोर कम से कम 40 रन से कम रहा।

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300 रनों का भी बचाव नहीं कर पाए थे गेंदबाज

गेंदबाजों ने महज 47 ओवर में ये रन गंवा दिये जिससे जिम्मेदारी मुख्य बल्लेबाजों पर ही आ जाती है क्योंकि अगर वॉशिंगटन सुंदर ने शानदार योगदान नहीं दिया होता तो भारत 300 रन के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाता। यह काफी हद तक पहले 10 पावरप्ले ओवरों में भारतीय सलामी बल्लेबाजों के सतर्कता भरे दृष्टिकोण की बदौलत ही हुआ जिसमें जरूरत के मुताबिक रन नहीं बने। मोईन अली ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा था कि जो टीमें पहले सफेद गेंद के क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के तरीके को अपनाती थीं अब वे इंग्लैंड की ओर देखने लगी हैं जिसने हाल के दिनों में इस प्रारूप में शानदार प्रदर्शन किया है।

धीमी बल्लेबाजी डूबो देती है टीम की नैया

धवन ने 77 गेंद में 72 रन बनाये जिसमें 13 चौके जड़े थे। जिससे उन्होंने 13 गेंदों में चौकों से 52 रन जोड़े। जबकि बचे हुए 20 रन के लिये उन्होंने 64 गेंद खेली और इसमें से 44 ‘डॉट’ गेंद रहीं क्योंकि वह पावरप्ले में रन नहीं बना पा रहे थे। जहां कप्तान एक ओर जूझ रहा था, वहीं गिल ने एक और अर्धशतक जड़कर अपने कुल औसत को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन उनकी पारी की रफ्तार भी बहस का विषय है। उन्होंने 65 गेंद में 50 रन बनाये जिसमें तीन छक्के और एक चौका जड़ा था। मतलब चार गेंद में 22 रन बने। उन्होंने बाकी के 28 रन 61 गेंद खेलकर बनाए।

तेजी से रन बनाने के करने होंगे प्रयास

पारी की नींव तैयार करने और तेजी से रन जुटाने का काम अंत की ओर छोड़ने के इसी रवैये से भारत ने टी20 विश्व कप गंवा दिया, लेकिन हैरानी की बात है कि इस सीरीज के लिए वनडे में खिलाड़ियों के बदलने के बावजूद बल्लेबाजी दृष्टिकोण वही पुराना वाला बना हुआ है। पारी का आगाज करने के लिये इतने सारे खिलाड़ी मशक्कत कर रहे हैं तो यह निहायत ही जरूरी है कि खिलाड़ी तेजी से रन जुटाए। ताकि 50 ओवर के वर्ल्डकप से तीन या चार महीने पहले नये चयनकर्ता पूल की 20 के करीब छंटनी करें तो रन की संख्या की अनदेखी नहीं की जा सकती।

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प्लेइंग इलेवन में किसी की भी जगह पक्की नहीं

धवन निश्चित रूप से अगले महीने बांग्लादेश में रोहित के साथ पारी का आगाज करेंगे और कोई गारंटी नहीं है कि शुभमन अंतिम एकादश में अपना स्थान बरकरार रख पायेंगे क्योंकि रोहित सलामी बल्लेबाज के तौर पर वापसी करेंगे। केएल राहुल मध्यक्रम में सूर्यकुमार यादव का स्थान ले सकते हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की तुलना में वनडे में ऋषभ पंत का स्ट्राइक रेट और औसत काफी बेहतर है लेकिन इस सीरीज के उप कप्तान को और अधिक निरंतर रहने की जरूरत है।

लैथम और विलियम्सन से पाना होगा पार

ईडन पार्क की पिच पर भारतीय तेज गेंदबाजों ने काफी कम गेंदबाजी की है। उन्हें टॉम लैथम और केन विलियमसन से मुकाबला करने के लिये तरीका ढूंढने की जरूरत है। ये दोनों खिलाड़ी इस प्रारूप में भारत के खिलाफ काफी निरंतर रहे हैं। उमरान मलिक 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने में प्रभावी रहे, अर्शदीप सिंह स्विंग हासिल करने की काबिलियत के बावजूद जूझते दिखे और शार्दुल ठाकुर भी अच्छा नहीं कर पाए।

टॉस की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

टॉस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा क्योंकि सेडोन पार्क पर शाम होते होते बल्लेबाजी करना आसान हो जाता है। अगर भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करती है तो उनके लिये अच्छा होगा क्योंकि स्पिनरों को शाम में ओस की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। देखना होगा कि युजवेंद्र चहल की जगह कुलदीप यादव को आजमाया जाता है या नहीं।